दुनिया जहांस्वास्थ्य

Corona का नया वैरिएंट B.1.1.529 क्यों माना जा रहा ज्यादा खतरनाक

दुनियाभर में कहर तबाही के लिए एकबार फिर से कोरोना वायरस एकबार फिर लौट आया है। कोरोना के नए वैरिएंट ZN.1 के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया है। कोविड का नया वैरिएंट भारत में तेजी से फैल रहा है। भारत में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 4 हजार से ज्यादा हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस के 628 नए मामले सामने आए हैं। अब सवाल है कि कोरोना के मामले दिसंबर महीने में ही अचानक बढ़ने क्यों लगते हैं।

साल 2019 में भी जब पहली बार कोरोना वायरस के मामले बढ़ने लगे थे, तब भी दिसंबर का ही महीना था। तब पूरी दुनिया में इसकी वजह से हाहाकार मच गया था। लंबा लॉकडाउन लगाने की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। पूरी दुनिया इसकी वजह से रुक गई थी। अब 4 साल बाद दूसरी और तीसरी लहर के बाद भी यह वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हर साल सर्दियां शुरू होते ही नए वैरिएंट सामने आ जाते हैं और कोरोना की लहर आ जाती है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि महामारी की पहली लहर के दौरान, मौसम की स्थिति ने प्रभावित किया कि वायरस कितनी आसानी से फैलता है। तापमान गरने और हवा शुष्क होने की वजह से उत्तरी गोलार्ध के देशों में कोविड-19 की दूसरी लहर में तेजी आई। चीन की सिचुआन इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी इसी तरह के बात की पुष्टि की है। उनके अध्ययन में पाया गया कि ठंडे इलाकों में रहने वाले लोगों में गर्म इलाकों में रहने वाले लोगों की तुलना में कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका ज्यादा रहती है।

Show More

Related Articles

Back to top button