जन्मदिन विशेष: संघर्ष से शिखर तक की कहानी, इंदिरा नूई ने कैसे दी Pepsico को नई पहचान?

भारतीय मूल की जानी-मानी बिजनेस लीडर इंदिरा नूई आज (28 अक्टूबर) अपना जन्मदिन मना रही हैं। कॉर्पोरेट दुनिया में उनका नाम उस शख्सियत के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने मेहनत, दृष्टिकोण और नेतृत्व के दम पर पेप्सिको जैसी वैश्विक कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से भी वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
इंदिरा नूई का जन्म 28 अक्टूबर 1955 को चेन्नई (तमिलनाडु) में हुआ था। उनके पिता बैंक अधिकारी थे और मां गृहिणी। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी नूई शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थीं।
IIM कोलकाता से MBA की पढ़ाई
इंदिरा नूई ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), कोलकाता से एमबीए किया। उनकी जिज्ञासा और सीखने की लगन ने उन्हें 1978 में येल यूनिवर्सिटी (अमेरिका) तक पहुंचाया, जहां से उन्होंने पब्लिक एंड प्राइवेट मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री ली।
कैरियर की शुरुआत
नूई ने अपने करियर की शुरुआत जॉनसन एंड जॉनसन और मेटुर बीर्डसेल जैसी कंपनियों से की। 1994 में वे पेप्सिको (PepsiCo) से जुड़ीं, और केवल कुछ सालों में उन्होंने अपनी रणनीतिक सोच और प्रबंधन कौशल से कंपनी में अहम स्थान बना लिया। 2001 में उन्हें कंपनी की CFO (Chief Financial Officer) बनाया गया, और 2006 में वे CEO बन गईं। इंदिरा नूई इस पद पर पहुंचने वाली कुछ गिनी-चुनी भारतीय महिलाओं में से एक हैं।
PepsiCo को नई दिशा
CEO बनने के बाद इंदिरा नूई ने पेप्सिको की रणनीति को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने परफॉर्मेंस विथ परपस (Performance With Purpose) का मंत्र दिया, जिसके तहत कंपनी ने हेल्दी फूड, सस्टेनेबल पैकेजिंग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर फोकस किया। उनकी लीडरशिप में कंपनी का राजस्व 35 अरब डॉलर से बढ़कर 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने पेप्सिको को सिर्फ एक “कोल्ड ड्रिंक कंपनी” से आगे बढ़ाकर एक हेल्थ और स्नैक कंपनी में तब्दील कर दिया।
वैश्विक पहचान और सम्मान
इंदिरा नूई को फॉर्च्यून और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित मैगजीनों ने कई बार दुनिया की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया। 2018 में उन्होंने पेप्सिको के CEO पद से इस्तीफा दिया, लेकिन उनकी रणनीति और नेतृत्व आज भी दुनिया भर के कॉर्पोरेट लीडर्स के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘माई लाइफ इन फुल: वर्क, फैमिली एंड आवर फ्यूचर’ (My Life in Full: Work, Family, and Our Future) के जरिए बताया कि एक भारतीय महिला के रूप में उन्होंने वैश्विक मंच पर सफलता पाने के लिए किन चुनौतियों का सामना किया।
प्रेरणादायक विरासत
इंदिरा नूई सिर्फ एक सफल CEO नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने यह साबित किया कि नेतृत्व केवल पद का नहीं, बल्कि दृष्टिकोण और मूल्यों का होता है। उनका जीवन यह संदेश देता है सपनों को बड़ा रखो, मेहनत ईमानदार रखो, और खुद पर भरोसा कभी मत खोओ।



