हमर छत्तीसगढ़

AI तकनीक से जंगल और वन्यजीवों की होगी 24 घंटे निगरानी

रायपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सामान्य सीसीटीवी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्रिय सुरक्षा समाधान हैं। यह कंप्यूटर विज़न (Computer Vision) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों का उपयोग करते हैं, जो वीडियो फुटेज का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में विश्लेषण करके संभावित खतरों की पहचान करते हैं और तुरंत अलर्ट भेजते हैं l

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। यह पहल वन्यजीवों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम तथा अवैध शिकार, लकड़ी तस्करी और अतिक्रमण जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वन बल प्रमुख अरुण पांडेय, पीसीसीएफ (वन्यजीव) ओम प्रकाश यादव तथा क्षेत्र संचालक गुरुनाथन एन.जी. के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर पी2पी (पीयर-टू-पीयर) मॉड्यूल और एआई कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में वन्यजीवों और संदिग्ध गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी।

एआई आधारित कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे प्रमुख वन्यजीवों की स्वतः पहचान कर सकेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए और अतिक्रमणकारियों जैसी संदिग्ध मानव गतिविधियों का भी स्वतः पता लगाएंगे। यह पूरी प्रणाली पोर्टेबल होगी, जिससे आवश्यकता के अनुसार इसे अन्य स्थानों पर भी स्थापित किया जा सकेगा।

जैसे ही किसी वन्यजीव या संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होगी, सिस्टम तुरंत व्हाट्सएप के माध्यम से फ्रंटलाइन वन कर्मियों और अधिकारियों को सूचना भेजेगा। इससे मौके पर तेजी से कार्रवाई करना संभव होगा।

इस परियोजना की खासियत यह है कि पीयर-टू-पीयर वायरलेस तकनीक के माध्यम से दूरस्थ जंगलों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। मैनपुर क्षेत्र में उपलब्ध 4जी और 5जी नेटवर्क को 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित एंटी-पोचिंग कैंपों और वन चौकियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।

वन विभाग में रिक्त पदों और सीमित मानव संसाधन की चुनौती को देखते हुए यह एआई आधारित निगरानी प्रणाली फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम करेगी। इससे गश्त की क्षमता बढ़ेगी, निगरानी में आने वाले अंतराल कम होंगे और संवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकेगी।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहले से ही थर्मल ड्रोन, उपग्रह चित्रों और गूगल अर्थ इंजन आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण तकनीक का उपयोग वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार की रोकथाम, अतिक्रमण की पहचान, वनाग्नि प्रबंधन और वन आवरण की निगरानी के लिए कर रहा है। नई एआई प्रणाली इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

रिजर्व ने पिछले चार वर्षों में 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है तथा 500 से अधिक तस्करों और शिकारियों की गिरफ्तारी की है। बेहतर संरक्षण और तकनीकी निगरानी के कारण यहां बाघ, हाथी, मालाबार पाइप हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उड़न गिलहरी, इंडियन पैराडाइज फ्लायकैचर, पेरेग्रीन फाल्कन, ऊदबिलाव और ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियों का भी दस्तावेजीकरण हुआ है।

यह स्मार्ट निगरानी नेटवर्क वन्यजीव गलियारों और संवेदनशील वन क्षेत्रों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना मध्य भारत में एआई आधारित संरक्षण तकनीक के सबसे उन्नत प्रयोगों में शामिल है और भविष्य में देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

परियोजना के तहत स्थापित किए जाने वाले प्रत्येक टावर, पी2पी कनेक्टिविटी प्रणाली, एआई कैमरा, टावर संरचना और आवश्यक सिविल कार्यों पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये की लागत आएगी। यह निवेश वन्यजीव संरक्षण, वन सुरक्षा और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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