सियासी गलियाराहमर छत्तीसगढ़

24 विधायकों को दिसंबर से सरकारी सुविधाएं नहीं मिलेंगी

रायपुर। ये ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने चुनाव नहीं लड़ा है। इनमें कांग्रेस से 22 और भाजपा व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे (जकांछ) से एक-एक विधायक हैं, पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दिया। इनके अलावा चुनाव हारने वाले विधायकों को भी सरकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा। फिलहाल चुनाव नहीं लड़ने वाले विधायकों को विधानसभा सचिवालय ने नो-ड्यूज कराने की सूचना दी है। इसमें बताया गया है कि एक दिसंबर से उन्हें सरकारी बंगला और भत्ता की पात्रता नहीं होगी क्योंकि वह अब पूर्व विधायक हो चुके हैं। विधानसभा सचिवालय के मीडिया प्रभारी गुरजीत सिंह सलूजा ने बताया कि यह प्रक्रिया के तहत ही होता है।

चुनाव जीतने के बाद जो नए सदस्य जुड़ते हैं, उन्हें सुविधाएं मिलती हैं। नई विधानसभा गठित होने से पहले पूर्व विधायकों को बंगला खाली करना पड़ता है।हर महीने मिलता है 30 हजार रुपए भत्ताबता दें कि एक विधायक को विधानसभा से किराया भत्ता के रूप में हर महीने 30 हजार रुपये दिया जाता है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में मौजूदा 71 विधायकों में से 22 का टिकट काटा है, जबकि भाजपा ने 13 में से एक विधायक का टिकट काटा है। 3 दिसंबर को मतगणना होगी। इसमें 1,181 प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला होगा। मनेंद्रगढ़ के विधायक डा. विनय जायसवाल, प्रतापपुर के डा. प्रेमसाय सिंह टेकाम, रामानुजगंज के बृहस्पत सिंह, सामरी के चिंतामणि महाराज, लैलूंगा के चक्रधर सिदार, सराईपाली के किस्मतलाल नंद, महासमुंद के विनोद सेवनलाल चंद्राकर, बिलाईगढ़ के चंद्रदेव प्रसाद राय, कसडोल के शकुंतला साहू, धरसींवा से अनिता योंगेंद्र शर्मा, रायपुर ग्रामीण के सत्यनारायण शर्मा, दंतेवाड़ा की देवती कर्मा, पाली-तानाखार के मोहित केरकेट्टा, सिहावा की डा. लक्ष्मी ध्रुव, नवागढ़ के गुरुदयाल सिंह बंजारे, पंडरिया की ममता चंद्राकर, डोंगरगढ़ से भुवनेश्वर बघेल, खुज्जी से छन्नी साहू, जगदलपुर से रेखचंद्र जैन, कांकेर से शिशुपाल सोरी, अंतागढ़ से अनूप नाग और चित्रकोट से राजमन बेंजाम।

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