हमर छत्तीसगढ़

वंदे मातरम्” के 150 वर्ष : मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और गौरव का प्रतीक

नवा रायपुर के इंद्रावती भवन में मनाया गया ‘वंदे मातरम् स्मरण दिवस

रायपुर, नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन के राजस्व विभाग संचालनालय में आज ‘वंदे मातरम् स्मरण दिवस’ का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत वातावरण में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि “वंदे मातरम्” मात्र एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है। 07 नवम्बर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह अमर रचना पहली बार ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में ‘आनंदमठ’ के एक अंश के रूप में प्रकाशित हुई थी। इस वर्ष इस प्रेरणास्पद गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में चार चरणों में ‘वंदे मातरम् स्मरणोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय एकता और स्वाभिमान की अलख जगाई। इस गीत ने असंख्य देशभक्तों को प्रेरित किया और आज भी यह देश के गौरव, संकल्प और एकता का अमर प्रतीक बना हुआ है।

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