जर्सी के कलर को लेकर खिलाड़ियों ने खारिज किया हॉकी इंडिया का दावा, कहा- हमसे नहीं पूछा गया

नई दिल्ली: भारतीय हॉकी टीम अगले महीने शुरू होने वाले हॉकी विश्व कप में एक बड़े बदलाव के साथ मैदान पर उतरेगी। पहली बार ऐसा होगा जब भारतीय पुरुष और महिला टीम अपनी पारंपरिक नीली जर्सी नहीं पहनेगी। हॉकी इंडिया ने केसरिया रंग की जर्सी जारी की है। इस जर्सी के रंग को लेकर काफी विवाद हो रहा है। विश्व कप का आयोजन 15 अगस्त से बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होगा। पुरुष टीम की कप्तानी हरमनप्रीत सिंह और महिला टीम की कप्तानी सलीमा टेटे करेंगी।
हॉकी टीम की जर्सी का रंग क्यों बदला?
हॉकी इंडिया का कहना है कि जर्सी का कलर बदलने के पीछे मुख्य वजह तकनीकी है। उनके अनुसार, नीली जर्सी कई बार नीले रंग के टर्फ में घुल-मिल जाती है, जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर अपने साथी खिलाड़ियों को पहचानने में दिक्कत होती है। हॉकी इंडिया ने दावा किया कि यह फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ चर्चा और उनकी सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
खिलाड़ियों ने किया दावा खारिज
रिपोर्ट के मुताबिक टीम के कई खिलाड़ियों और सदस्यों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने पुरुष और महिला टीम से जुड़े पांच सदस्यों से बात की और उनसे से किसी से भी इस बदलाव को लेकर कोई राय नहीं ली गई थी। एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्हें इस बारे में न तो पूछा गया और न ही किसी तरह की चर्चा का हिस्सा बनाया गया।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हॉकी इंडिया के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और कार्यकारी समिति के सदस्यों को भी जर्सी के रंग में बदलाव की जानकारी पहले से नहीं थी। कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें जर्सी बदलने के फैसले की जानकारी नहीं थी और न ही वे किसी आधिकारिक बैठक का हिस्सा थे, जहां इस विषय पर चर्चा हुई हो।
पूर्व खिलाड़ी नाराजगी जता रहे हैं
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व खिलाड़ी भी जर्सी के कलर बदलने पर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इसे शर्मनाक बताया। वहीं 1980 ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा कि इस जर्सी को देखकर मुझे कोई प्रेरणा नहीं मिलती।



